पुरुषों के लिए सत्याग्रह - पुरूष आयोग के लिए राष्ट्रीय धरना


दामन वेलफेयर सोसाइटी स्व-वित्त पोषित, स्व-समर्थित स्वयंसेवक आधारित एक गैर सरकारी पंजीकृत संगठन हैं जो की भारत में पुरुषों के अधिकारों की आवाज़ उठाने के आंदोलन "सेव इंडियन फैमिली (SIF) मूवमेंट" का अभिन्न हिस्सा है।

भारतवर्ष में पुरुषों की आत्महत्याओं की लगातार बढ़ती दर (प्रति वर्ष 91000 से अधिक), लैंगिक आधार पर बने कानूनों के कारण निर्दोष पुरुषो की जेलों में बढ़ती संख्या, पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए कोई नीति नहीं होने के कारण प्रोस्टेट कैंसर जैसी पुरुषों की बीमारियों की जागरूकता में कमी, पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा, लड़कों के प्रति बाल कल्याण मंत्रालय की पूर्ण उपेक्षा और उदासीनता, घरेलू हिंसा, वैवाहिक क्रूरता और पुरुष के यौन शोषण व बलात्कार जैसे अपराध में पुरुषो को पीड़ित ना मान कर उनकी उपेक्षा करना। स्कूल ड्रॉप-आउट लड़कों की दर सर्वाधिक होना, महिलाओं द्वारा लड़कों का यौन शोषण, भारत के किसी भी कानून या नीति बनाने में पुरुषों का प्रतिनिधित्व नहीं होना, भारत का बजट लैंगिक पक्षपात पूर्ण होना कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो की पुरुषों और लड़कों के कल्याण से संबंधित हैं और जिनको हमेशा से सरकारों और समाज द्वारा बड़े पैमाने पर अनदेखा किया जाता रहा है।

दामन और उनके सभी सहयोगी गैर सरकारी संगठन पुरुषों के लिए लंबे समय से सरकार से एक राष्ट्रीय पुरूष आयोग के गठन की मांग करते रहे हैं परन्तु सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों ने हमारे मांगों की उपेक्षा ही की है।

वर्षो से भारतीय राजनीतिक दलों की निरंतर लिंग आधारित तुष्टिकरण नीतियों के कारण एक विशाल पुरुष वोट बैंक विकसित हुआ है। अब पुरुष संगठन भी विकल्प तलाश रहे हैं और ये देख रहे हैं कि कौन सा राजनीतिक दल अपने 2019 लोकसभा चुनावी घोषणा पत्र में पुरुषों का मान रखता है। अब समय आ गया है कि राजनीतिक दल, महिला तुष्टीकरण के नाम पर पुरुष वोट बैंक को अनदेखा करना बंद करें। पुरुष वोट बैंक का प्रभाव अब भारत की संसद में भी दिखाई दे रहा है जहाँ कई सांसदों ने पुरुषों के मुद्दों को महसूस किया और उनके लिये संसद में आवाज उठाई।

पुरुषों के लिए सत्याग्रह 3 मार्च 2019

अपनी माँगों को लेकर सेव इंडियन फैमिली (SIF) के सभी राष्ट्रीय नेता, कार्यकर्ता, स्वयंसेवक, सत्याग्रह के लिए 3 मार्च 2019 (रविवार) को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एकत्रित हो रहे हैं, जो पुरुषों के लिए अब तक की दुनिया मे सबसे बडा धरना होगा।

पुरुषों के प्रति राजनीतिक उदासीनता से थक चुके, भारत में पुरुष अधिकारो के संघर्षरत कार्यकर्ता बड़ी संख्या में दुनिया भर से शामिल हो कर सरकार और राजनीतिक दलों को आपनी मांगों से एक बार फिर अवगत कराएंगे तथा उन पर कार्य करने के लिए एक कड़ा और स्पष्ट संदेश भी देंगे।

यह सत्याग्रह भारत सरकार से पुरुषों के लिए राष्ट्रीय आयोग की मांग करेगा। इनके अलावा, हमारा विरोध भारत के हर उस लैंगिक पक्षपात पूर्ण कानून और नीतियों के खिलाफ भी होगा, जो पुरुष आयोग के अभाव में, पक्षपाती तरीके से बनाई गई है। भारत में कानून बनाने की प्रक्रिया पक्षपात पूर्ण होने के कारण ही चाइल्ड कस्टडी, दहेज, घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, कार्यस्थल उत्पीड़न, POCSO आदि जैसे क़ानून बना दिये गए है जिनका खुलकर दुरुपयोग हो रहा है।

#MeToo का अंत 2 मार्च 2019 को कालिंदी कुंज, नई दिल्ली के "शमशान यात्रा", "दाह संस्कार" और "पिंड-दान" के साथ होगा।

#MeToo आंदोलन ने भारत में "डिजिटल मॉब लिंचिंग" को जन्म दिया, जबकि जिन देशों में उसकी उत्पत्ति हुई, वहाँ पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी है। झूठ और पाखंड से ओतप्रोत और बिना किसी जिम्मेदारी के #MeToo ने सोशल मीडिया पर मौब मानसिकता के एक नए और खतरनाक युग को शुरू किया है, जिसके कारण कई पुरुषों के पूरे जीवन, करियर, मान-सम्मान को तबाह किया है।

इस समाज को #MeToo से बचाने के लिए 2 मार्च 2019 को दामन भारत भर के विभिन्न गैर सरकारी संगठनो के साथ दिल्ली में पहले से ही मृत #MeToo का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। हम 2:00 PM #MeToo की शवयात्रा दिल्ली के कलिनिदी कुंज के शमशान घाट पर ले जाएंगे तथा उसका अंतिम संस्कार करने के बाद #MeToo का पिंड-दान भी करंगे।

वार्ता में अनुपम दुबे, मनीष श्रीवास्तव, धीरज राजपाल, गौरव भट्टाचार्जी, जय प्रकाश गुप्ता, अजय चक्रवर्ती आदि उपस्थित रहे।

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