पितृ दिवस - 2019 (प्रेस विज्ञप्ति)

June 16, 2019

 

पितृ दिवस - 2019 (प्रेस विज्ञप्ति)

 

जागरूकता अभियान: स्थल – रेव 3, कानपुर

 

दामन वेलफेयर ट्रस्ट, माता-पिता के सम्बन्ध-विच्छेद से उत्पन्न सिंगल-पैरेंट फैमिली के बच्चों पर हो रही विरक्ति या "पैरेंटल एलियनेशन सिंड्रोम" के गम्भीर प्रभाव को पहचानता व समझता है। पति-पत्नी के टूटते रिश्तों की बढ़ती दरों से माता-पिता से अलग हुए बच्चों पर हो रहे क्रूर अलगाव को समाप्त करने के लिए यह संगठन प्रतिबद्ध है।

 

इस बाबत दामन ने एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस से हम उन पिताओं और बच्चों कि तकलीफों को उजागर करना चाहते हैं जो एक दूसरे से मिलने से वंचित रहते हैं, और जो कि मानव अधिकारों का गम्भीर उल्लंघन है। इस अलगाव का प्रमुख कारण लैंगिक आधार पर भेदभावपूर्ण कानून है, अतः हम पारिवारिक कानून में संशोधन की मांग कर रहे हैं। यह अभियान उन बच्चों के लिए है जो कि इन परिस्थितियों में एक असहाय शिकार हैं। यह अभियान अपने नैसर्गिक माता-पिता से जुड़े रहने के बच्चों के हक़ कि रक्षा करने की ओर एक कदम है।

 

पितृ दिवस दुनिया भर में "पिता" के योगदान को सराहने और उन्हें सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। यह उनके बच्चों के प्यार एवं अभिनंदन की अभिव्यक्ति है। वर्तमान युग के पिता अपने बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कल्याण की ओर बेहद सक्रीय हैं। परन्तु फिर भी समाज में व्याप्त महिलावाद के कारण, भारत में मातृ-शिशु संबंध एक उत्कृष्ट स्थिति प्राप्त करता है। दुर्भाग्य से, यह उस पिता की कीमत पर आता है जिसकी भूमिका को बच्चे के विकास में मुख्य आकर्षण नहीं होती है। इस जन-भ्रांति ने कानूनी व्यवस्था में निहित लिंग-पूर्वाग्रह में योगदान दिया है।

 

बच्चों कीकस्टडी के मामलों में हमेशा महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया जाता है, और ‘शेयर्ड पेरेंटिंग’ व्यवस्था, जो बच्चे की समग्र वृद्धि के लिए अतिअवश्यक होती है, उसे हमेशा ही अनदेशी की जाती है । यह बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के सबसे बुरे रूपों में से एक है, क्योंकि बच्चे Parental Alienation Syndrome (PAS) तथा Reactive Associative Disorder जैसे मनोवैज्ञानिक विकारों के परिणाम स्वरूप बच्चे के समग्र विकास में क्षति होती है।

हम भारतीय पारिवारिक कानूनों में निम्न सुधार और संशोधन की मांग कर रहे हैं:

  1. Guardianship and Custody Laws के सन्दर्भ में Shared Parenting को कानूनी रूप से अपनाने की Law Commission Report No 257  की सिफारिशों को अविलम्ब लागू करें।

  2. महिला या बाल मंत्रालय से मुक्त बच्चों के लिए एक अलग बाल मंत्रालय स्थापित किया जाए क्योकि मौजूदा मंत्रालय बच्चों के अधिकारों को नजरअंदाज कर रहा है।

  3. हम सरकार से Hague Convention पर हस्ताक्षर करने का आग्रह करते हैं! चूंकि, भारत के Law Commission के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाल अपहरण के मामलों के संबंध में, अपहरण करने वाले माता-पिता में से 68% माताएँ हैं, जिनमें से 54% उस देश में चली गईं, जिसमें उन्होंने नागरिकता धारण की थी! Hague Convention सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय संधि है और इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने से समाज में पिताहीन बच्चों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है!

  4. यह अनिवार्य किया जाए कि बाल कल्याण से संबंधित सभी दस्तावेज - जो कोर्ट केस सम्भंदित हो या भिन्न प्रकार के हों और जिनमे मुख्य रूप से पासपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट्स, बैंक खाते, स्कूल दाखिले से सम्बंधित तथा अन्य कागज़ शामिल हैं - इन पर दोनों जैविक माता-पिता के हस्ताक्षर सहमति से लिए जाए। इसके अलावा बच्चे का उपनाम तलाक के बाद न बदला जाने वाला नियम पारित किया जाए।

  5. पिता को भी अपने बच्चे के जन्म पर पितृत्व अवकाश सभी संगठनों द्वारा दिया जाए जिस से वह भी अपने नवजात शिशु कि देखभाल करने में समर्थ रहे।

दुनिया भर में कई संगठनों द्वारा किये गए अनुसंधानों द्वारा चौंकाने वाली जानकारी निकली है। पाया गया है कि पिता की देखभाल से वंचित रहे बच्चे निम्न समस्याओं के शिकार हो सकते हैं:

  • वे 5 गुना अधिक आत्महत्या करते हैं

  • वे 9 गुना अधिक मात्रा में स्कूल छोड़ते है

  • वे 14 गुना अधिक बलात्कारी हो सकते है

  • वे 20 गुना अधिक मादक पदार्थों की लत का शिकार या जेल के कैदी बन सकते हैं

  • वे 32 गुना अधिक मात्रा में घर छोड़कर भागने के संभावी होते हैं

अतः इसमें कोई शक नहीं है कि बच्चे की देखभाल में पिता की भागीदारी को दुनिया में कोई भी प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है। एक कहावत के मुताबिक़ "पिता सौ शिक्षकों से भी बेहतर है"। इस लिहाज़ में तलाक व अलगाव के मामलों का सबसे बेहतरीन समाधान 'संयुक्त हिरासत' और 'शेयर्ड-पेरेंटिंग' है। बच्चे इस देश का 40% जनसँख्या का हिस्सा हैं फिर भी वे नज़रअंदाज़ हुए खामोश, असहाय शिकार हैं क्योंकि वे "वोट बैंक" का हिस्सा नहीं हैं।

 

बाल-शोषण और मानव अधिकारों के इस तरह हो रहे उल्लंघन के बेहद संवेदनशील विषयों को जनता के समक्ष रखने और समाज में जागरूकता पैदा करने हेतु, हम अपने दोस्तों और मीडिया बंधुओं से अपील कर आमंत्रित करते हैं कि हम बच्चों के बचपन तथा पितृहीन समाज से बच्चों को बचाने के प्रति खुद को समर्पित करें, जिस से बच्चों के रूप में देश के धरोहर की खुशहाली और प्रगति बनी रहे।

अध्यक्ष

 

Date: 16/06/2019

अनुपम दुबे

9889188810

 

 

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