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साली बोली - जीजा ने सपने में छेड़ा था, अदालत ने किया बरी
न्यायपालिका को अब 'प्रैक्टिकल' होने की सख्त आवश्यकता है। जब एक पक्ष का बयान ही सजा का एकमात्र आधार बन जाता है, तो वहां न्याय की गुंजाइश समाप्त और अन्याय अवश्यंभावी हो जाता है। क्या हमारी व्यवस्था में उन लोगों के लिए कोई दंड निर्धारित नहीं होना चाहिए जो अपनी निजी रंजिश या लापरवाही से किसी का जीवन अधर में लटका देते हैं?
क्या 7 साल बाद मिली 'बाइज्जत बरी' की डिग्री उस एयरफोर्स कर्मी के उन छीने हुए सालों और सामाजिक अपमान का मुआवजा हो सकती है? असली अपराधी कौन—आरोप लगाने वाला या
Mar 112 min read
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